• Rigved, Yajurved and Atharved (3 Ved Book Set)

ऋग्वेद आर्यों एवं भारतीयों की ही नहीं, विश्व की सब से प्राचीन पुस्तक है। सब से प्राचीन संस्कृति-वैदिक संस्कृति के प्राचीनतम लिखित प्रमाण होने के कारण ऋग्वेद की महत्ता सर्वमान्य है- फिर भी ऋग्वेद की ऋचाओं का ऋषियों ने ईश्वरीय ज्ञान के रूप में साक्षात्कार किया था या उन्होंने उन की रचना की थी, यह विषय विवादास्पद है। ऋग्वेद का प्रस्तुत अनुवाद सायण भाष्य पर आधारित है। सायण ने चार वेदों पर पूर्ण भाष्य लिखे हैं और वे उपलब्ध भी हैं। उन्हें देशविदेश में विश्वविद्यालय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। सायण ने ऋचाओं के प्रत्येक शब्द का विस्तार से अर्थ दिया है। प्रत्येक शब्द की व्याकरण सम्मत व्युत्पत्ति दी है तथा उन्होंने अपने समय के अनेक ग्रंथों के उद्धरण दे कर अपने अर्थ की पुष्टि की है। सायण के अनुसार अधिकांश मंत्र मानवजीवन से ही संबंधित हैं। इस प्रकार एकमात्र सायण ही ऐसे भाष्यकर्ता हैं, जिन्होंने बिना किसी पूर्वाग्रह के वेद मंत्रें का अर्थ किया है और उन के भाष्य के आधार पर साधारण पाठक वैदिक कालीन संस्कृति का सही रूप समझपरख सकता है।


यजुर्वेद-द्वितीय वेद के रूप में प्रसिद्ध यजुर्वेद ज्ञान (वेद) की वह शाखा है, जिस में यज्ञीय कर्मो का वर्चस्व है, क्योंकि इस के गद्यात्मक मंत्र पुरोहितों द्वारा यज्ञ संपन्न कराने के लिए गए थे, इसीलिए आज भी विभिन्न संस्कारों एवं यज्ञी

Author's Name Dr. Ganga Sahay Sharma, Dr. Rekha Vyas
Binding Hard Back
Language Hindi
Product Code: 1750_2
ISBN:
Availability: In Stock
All disputes are subject to Delhi Courts Jurisdiction only.

Write a review

Note: HTML is not translated!
    Bad           Good

Rigved, Yajurved and Atharved (3 Ved Book Set)

  • Brand: Vishv Books
  • Product Code: 1750_2
  • ISBN:
  • Availability: In Stock
  • INR3,300.00
  • INR1,980.00