• Samved, Yajurved, Atharved and Rigved (4 Ved Book Set

सामवेद-'सामवेद' को 'ऋग्वेद' का पूरक कहा जाता है. इस रूप में इस की महत्ता 'ऋग्वेद' से किसी भी तरह काम नहीं मानी जा सकती. इसीलिए यह वेदत्रयी में गिना जाता है. गीता में उपदेशक कृष्ण ने 'वेदानां सामवेदोअस्मि' कह कर सामवेद की विशिष्ट्ता की ओर ही संकेत किया है. सामवेद का प्रस्तुत अनुवाद सायण भाष्य पर आधारित है, क्यूंकि सायणाचार्य ने वैदिक ऋचाओं को समझने के लिए परंपरागत ज्ञान, तर्क एवं मनन का पूरापुरा सहारा लिया था. इस से भी बड़ी बात यह है कि उन्होंने अन्य आचार्यो की तरह सामवेद की ऋचाओं को किसी 'विशेष वाद' का चश्मा पहन कर नहीं देखा है, बल्कि उन के प्रसंगानुसार मानव जीवन से संबंधित अर्थ ही दिए हैं.


यजुर्वेद-द्वितीय वेद के रूप में प्रसिद्ध यजुर्वेद ज्ञान (वेद) की वह शाखा है, जिस में यज्ञीय कर्मो का वर्चस्व है, क्योंकि इस के गद्यात्मक मंत्र पुरोहितों द्वारा यज्ञ संपन्न कराने के लिए गए थे, इसीलिए आज भी विभिन्न संस्कारों एवं यज्ञीय कर्मों के अधिकांश मंत्र यजुर्वेद के ही होते हैं. इस प्रकार 'यजुर्वेद' से वैदिक काल की यज्ञीय संस्कृति की झलक मिलती है. साथ ही ज्ञानविज्ञान, आत्मापरमात्मा तथा अन्य समाजोपयोगी ज्ञान भी इस में विद्यमान है. यह ज्ञान जनसाधारण तक पहुंच सके-इसी उदेशय से 'यजुर्वेद' का य

Author's Name Dr. Ganga Sahay Sharma, Dr. Rekha Vyas
Binding Hard Back
Language Hindi
Product Code: 535_1
ISBN:
Availability: In Stock
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Samved, Yajurved, Atharved and Rigved (4 Ved Book Set

  • Brand: Vishv Books
  • Product Code: 535_1
  • ISBN:
  • Availability: In Stock
  • INR3,045.00
  • INR1,827.00